वाशिंगटन राज्य विश्वविद्यालय के प्रोफेसर मेसुत सिसेक के नेतृत्व में एक नए अध्ययन के अनुसार, चैटजीपीटी वैज्ञानिक अनुमानों की जांच करते समय असंगत और अस्थिर उत्तर दे सकता है. अध्ययन में वैज्ञानिक कागजों से अनुमान लेकर चैटजीपीटी को प्रश्न पूछे गए. 700 से अधिक अनुमान शामिल थे और प्रत्येक प्रश्न को 10 बार दोहराया गया. 2024 में प्रयोग में चैटजीपीटी के सही उत्तर की दर 76.5% थी, जो 2025 में 80% तक पहुंच गई. यदि यादृच्छिक अनुमान को ध्यान में रखा जाए तो इसकी सटीकता 60% अधिक थी, जो एक निम्न ड अंक के करीब थी. सिसेक ने कहा, ‘एक ही प्रश्न कई बार पूछे जाने पर आपको अलग-अलग उत्तर मिलते हैं. हमने एक समान प्रश्न के 10 बार दोहराने पर देखा कि चैटजीपीटी केवल 73% अनुमान को सही बता सकता है.’ अध्ययन के परिणाम रूटर्स बिजनेस रिव्यू में प्रकाशित किए गए हैं. सिसेक ने कहा कि व्यवसाय नियोजकों को AI के परिणामों की जांच करनी चाहिए और उनके क्षमताओं के बारे में शिक्षा प्रदान करनी चाहिए. उन्होंने कहा, ‘हमेशा शंका करें, मैं AI के खिलाफ नहीं हूं, लेकिन आपको बहुत सावधान रहना चाहिए.’
ट्विटर पर साझा करें: चैटजीपीटी के असंगत उत्तरों पर विश्वविद्यालय की चेतावनी वैज्ञानिक अनुमानों की जांच में अस्थिरता


