ईरिका एवेंस, सिएटल के पहले काले शहरी अधिवक्ता, नवंबर में आम चुनाव में जीत लेने वाली थीं. यह उनके पिता ली एवेंस के 57 साल बाद की घटना थी, जो 1968 के ओलंपिक खेलों में अपना इतिहास बनाए. उन्होंने 400 मीटर दौड़ में स्वर्ण पदक जीता था, लेकिन उसके बाद की घटनाएं इतिहास की कहानियों में लिखी गई. जून 1968 में डॉ॰ मार्टिन लूथर किंग जूनियर की हत्या हो गई थी, जबकि ओलंपिक में टॉमी स्मिथ और जॉन कारलस ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर पहली विरोध प्रदर्शन किया. उन्होंने 200 मीटर और 400 मीटर दौड़ में पदक जीते थे, लेकिन उनके आंदोलन के कारण उन्हें बरकरार कर दिया गया. ली एवेंस के लिए एक चुनौती आई जब उन्हें अपने दौड़ के लिए तैयार होना पड़ा. ईरिका ने कहा, ‘मेरे दादा ली ने नहीं दौड़ा, टॉमी और जॉन ने कहा, ली, तू दौड़ ले और हम सभ के लिए दौड़ ले.’ उन्होंने दोनों दौड़ में स्वर्ण पदक जीता और उनके बरेट के साथ अपना हाथ उठाया. उनके दौड़ के दिन एक टेलीग्राम आया था जिसमें केके के लोगों ने उनकी हत्या करने की धमकी दी थी. ईरिका ने कहा, ‘मेरे दादा ने कहा कि जब वे अपना बरेट उठाते हैं तो उनके चेहरे पर खुशी दिखाई देती है, और वे खुशी से बरेट उठाते हैं क्योंकि वे लोगों को मारना कठिन लगता है.’ ईरिका की बहन ने भी आंदोलन में भाग लिया, उन्होंने खिलाड़ियों के लिए बरेट और ग्लोव दिए. ईरिका ने कहा, ‘यह व्यक्ति जो कभी नहीं झुकता, जो अपना अधिकार लड़ता रहता है.’ उनकी जीत न केवल एक निर्वाचन के लिए थी, बल्कि एक लंबे संघर्ष के परिणाम थी.
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